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Laal Kitab

The five set of books having Red Hard Cover, is linked to Hindu's auspicious color Red. Presently available version written in 19th century by the master of the science of Laal kitab, Pandit Roop Chand Joshi of Pharwala Dist. Jalandhar, Punjab, showers the blessings of the Almighty for the welfare of the mankind.

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It was the first time that a book explained how certain planetary position in one's Horoscope can act in relation to one's Palm Lines. For the first Time in the history of Astrology the Laal kitab introduced a New Style of Horoscope Analysis with quick Remedies (Upaya) which are in ease and within the reach of general public.Laal Kitab devoid the Pooja and the use of Gemstones as the ultimate remedies and so the (Upaya) Remedies under this are closely related to day to day activities.

It takes years in understanding this relation of Physiology and Anatomy so as to qualify as a Medical Astrologer. Saai Shakti institute focuses on building such experts in the field of medical astrology by providing with the best training and knowledge to the students.

The 5 Books are as below :

  1. Laal Kitab Ke Farman(1939) 383 pages
  2. Laal Kitab ke Arman (1940) 280 pages
  3. Laal Kitab (third Part) (1941) 428 pages
  4. Laal Kitab ke Farman (1942) 384 pages
  5. Ilme Samudrik ki buniyad par ki Lal Kitab (1952) 1173 pages

लाल किताब मूल और पूर्ण रूप से एक भारतीय आध्यात्मिक ग्रन्थ है। यह ग्रन्थ सामुद्रिक शास्त्र की सम्पूर्ण गहराइयो को स्वयं में समेटे हुए है। "लाल किताब के फरमान" किस्मत और कुदरत के परस्पर सम्बन्धो को दर्शाता है। और "लाल किताब के अरमान"फलित का ग्रन्थ है। फलित ज्ञान आत्मरक्षा तथा मन की शांति में सहायक होते है ।

लाल किताब की व्याख़्या है कि जन्मकुंडली तो जन्म लेने के बाद बनायीं गयी किन्तु भाग्य कुंडली तो विधाता ने पहले ही जातक की हथेली पर बना रखी है।

प्राचीन ज्योतिष जहाँ समाप्त होता है, लाल किताब वहां से आरम्भ होती है । इसे आप Astro Palmistry भी मान सकते है।

परम् दैवीय शक्ति की कृपा,प0 रूप चंद जोशी जी के श्री चरणों का ध्यान और प0 बेनी माधव गोस्वामी जी का शुभाशीर्वाद ही saai shakti institute of mystique sciences के इस कोर्स के Design में मूल है।

course contents को as it is रखने का प्रयास किया गया है जैसा पुस्तक के लिप्यांतरण में प0 जी ने लिखा है।

Syllabus ( विषय सूची ) :

Medium ( हिंदी ) :

प्रथम खंड
फरमान न0 1       लाल किताब के फरमान
फरमान नं0 2       कुदरत का हुक्मनामा
फरमान न0 3       हथेली में कहाँ है भाव ,कौन सा  
फरमान न0 4       विद्वानों को ज्योतिष में संदेह क्यों ?
फरमान न0 5       व्याकरण
फरमान न0 6      भाग्य की ग्रन्थियां ही गृह मण्डल है
ग्रहों के पक्के घर, राशि का गृह सम्बन्ध,राशियों की आयु,नैसर्गिक मैत्री चक्र,
ग्रहो की अवधि,जन्मदिन व् जन्मदिन के समय का ग्रह,द्शा साधन,महादशा में अंतर्दशा का समय ।
              कुछ विशेष परिभाषाये, ग्रह फल का ग्रह, राशिफल का ग्रह,पापी ग्रह, धर्मी ग्रह,
                    नेक और बद ग्रह,अंधे ग्रह,नहोराते के ग्रह ,टकराव के ग्रह,
            बाल ग्रह तथा युवा ग्रह,वर्ष अनुसार सक्रिय ग्रह,सामुद्रिक में राशियों के निशान,राशिपति,
                पक्के घर और  संयुक्त घर।फरमान न0 7 बुत से रूह ने अपना घर क्यूँ पूछा
                           ग्रहो व् राशियों का परसपर सम्बन्ध।
फरमान न0 8  बारह (12) पक्के घर
                                           ग्रहो की दृष्टि
                                           उलझन के ग्रह (पितृ ऋण)
                                           पितृ ऋण के उपाय
                                           महादशा
                                           ग्रहो के उपाय
फरमान न0 9    उपाय - कब और कैसे ?
फरमान न0 10   ग्रहो का प्रभाव
फरमान न0 11   ग्रहो की चाल (जातक और प्रकृति)
फरमान न0  12   कुंडली निर्माण एवम् शोधन
फरमान न0  13   वर्षफल
फरमान न0  14   कुंडली के प्रकार (पुरुष /स्त्री में से
                                               किस की कुंडली प्रबल )
फरमान न0 15  प्रायोगिक उदाहरण (हाथ से बनाई
                                             कुंडली,ज्योतिष की बनाई कुंडली)
फरमान न0 16  खानवार वस्तुऍ
                                             प्रत्येक ग्रह का मकान
                                             प्रत्येक ग्रह का इंसान
                                             प्रत्येक ग्रह की रेखाएं
फरमान न0 17   धन योग
                                              सम्पति या पुण्य के योग
                                              दान-पुण्य योग    
                                              ब्याह -शादी का योग
                                              संतान योग
                                              यात्रा के योग
                                              रोग -बीमारी
                                              जन्मकुंडली से आयु विचार
फरमान न0 18     आशिर्वाद
खुश रहो आबाद दुनिया ,मालो जान बढ़ते रहो ।
                    मदद मालिक अपनी देगा,नेकी खुद करते रहो ।।

Days : Every Sunday and Monday(Once in a week)
Fees. : INR 24 000
Days. : Every Sunday and Monday
Duration.* : 6 to 8 month
Classes. : Once in a week
Fees. : 24,000 INR
*Students may reduce the time period by attending.

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